मसूरी।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वाधान में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने मसूरी स्थित सिविल न्यायालय में लोक अदालत का आयोजन किया जिसमें पचास से अधिक वादों का निस्तारण किया गया।
सिविल न्यायाधीश शमशाद अली ने प्राधिकरण सदस्य अधिवक्ता अरविंद चौहान के सहयोग से पचास से अधिक वादों का निस्तारण किया। जिसमें दो वाद सिविल, 10 वाद अपराध, 30 वाद एमवी एक्ट के निस्तारित किए। इस मौके पर सिविल जज शमशाद अली ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय व उच्च न्यायालय के निर्देश पर हर तीन माह में लोक अदालतों का आयोजन किया जाता है, जिसमें समझौते वाले वाद चाहे सिविल, अपराध व कंपाउंडेबल वाले मामले दोनों पक्षों के साथ समझौता कर निस्तारित किए जाते हैं। जिसमें दोनों पक्षों के वाद लंबे समय न चलकर कम समय में निस्तारित किए जाते है, व इसका लाभ मिलता है वहीं इसकी अपील भी नहीं होती है व पक्षकारों को उनका अधिकार मिल जाता है। उन्होंने कहा कि दो मामले सिविल में अधिवक्ता आलोक मेहरोत्रा के निपटाये गये जो लंबे समय से चल रहे थे ऐसे में दोनों पक्षों का समय व धन की हानि होती है, जिन्हें लोक अदालत में निस्तारित किया गया। वहीं इस मौके पर एक महिला का मामला भी आया जिसमें पारिवारिंक संपत्ति का था जिसमें एक महिला जो मर चुकी है व उसकी दोनों बेटियां भी अलग रहती है व उनका वाद निस्तारित नहीं हो पा रहा है उन्हें सलाह दी गई कि वह निशुल्क अधिवक्ता लें व उनकी सलाह पर उचित अदालत में मुकदमा दर्ज करें व उसके बाद लोक अदालत में उस मामले का निस्तारण किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि लोक अदालत में प्राधिकारण व वन विभाग के मामले नहीं आते वह कंपाउडेबल नेचर के नहीं होते है वह रेगुलर अदालत में जाते हैं, वहीं उन्होने कहाकि एमवी एक्ट के मामले होते है जिसमें चालान लोक अदालत में आ जाता है व पार्टी सीओ के यहां चालान जमा कर देती है तो उन मामलों यहां निस्तारित किया जाता है। इस मौके पर वरिष्ठ अधिवता आलोक मेहरोत्रा, अधिवक्ता अरविंद चौहान, वैयक्तिक सहायक कैलाश कन्याल, वरिष्ठ सहायक सुमित निराला, अभियोजन की ओर से कोर्ट मोहर्रिर प्रीति कुंवर, व सुमित बिष्ट आदि मौजूद रहे।
सिविल न्यायाधीश शमशाद अली ने प्राधिकरण सदस्य अधिवक्ता अरविंद चौहान के सहयोग से पचास से अधिक वादों का निस्तारण किया। जिसमें दो वाद सिविल, 10 वाद अपराध, 30 वाद एमवी एक्ट के निस्तारित किए। इस मौके पर सिविल जज शमशाद अली ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय व उच्च न्यायालय के निर्देश पर हर तीन माह में लोक अदालतों का आयोजन किया जाता है, जिसमें समझौते वाले वाद चाहे सिविल, अपराध व कंपाउंडेबल वाले मामले दोनों पक्षों के साथ समझौता कर निस्तारित किए जाते हैं। जिसमें दोनों पक्षों के वाद लंबे समय न चलकर कम समय में निस्तारित किए जाते है, व इसका लाभ मिलता है वहीं इसकी अपील भी नहीं होती है व पक्षकारों को उनका अधिकार मिल जाता है। उन्होंने कहा कि दो मामले सिविल में अधिवक्ता आलोक मेहरोत्रा के निपटाये गये जो लंबे समय से चल रहे थे ऐसे में दोनों पक्षों का समय व धन की हानि होती है, जिन्हें लोक अदालत में निस्तारित किया गया। वहीं इस मौके पर एक महिला का मामला भी आया जिसमें पारिवारिंक संपत्ति का था जिसमें एक महिला जो मर चुकी है व उसकी दोनों बेटियां भी अलग रहती है व उनका वाद निस्तारित नहीं हो पा रहा है उन्हें सलाह दी गई कि वह निशुल्क अधिवक्ता लें व उनकी सलाह पर उचित अदालत में मुकदमा दर्ज करें व उसके बाद लोक अदालत में उस मामले का निस्तारण किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि लोक अदालत में प्राधिकारण व वन विभाग के मामले नहीं आते वह कंपाउडेबल नेचर के नहीं होते है वह रेगुलर अदालत में जाते हैं, वहीं उन्होने कहाकि एमवी एक्ट के मामले होते है जिसमें चालान लोक अदालत में आ जाता है व पार्टी सीओ के यहां चालान जमा कर देती है तो उन मामलों यहां निस्तारित किया जाता है। इस मौके पर वरिष्ठ अधिवता आलोक मेहरोत्रा, अधिवक्ता अरविंद चौहान, वैयक्तिक सहायक कैलाश कन्याल, वरिष्ठ सहायक सुमित निराला, अभियोजन की ओर से कोर्ट मोहर्रिर प्रीति कुंवर, व सुमित बिष्ट आदि मौजूद रहे।
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